नगरपालिका बनलसे बह्रल साँसट

नगरपालिका बनलसे बह्रल साँसट

थारु भाषा । चिन्तामणि थारू

बर्तमान सरकार नयाँ नेपाल बनाएक नावमे धमाधम नगरपालिका घोषित करेमे लागल बा । का नगरपालिका घोषित कइलेसे भर नयाँ नेपाल बनी ? नेपालके गाँव गाँवमे बिकासके लहर आई ? दूर दराजके जनतन डेहल सुबिधा कटौटी कइले नयाँ नेपाल बनी ? गरीब नेपाली किसानके मुरेपर आर्थिक भार थुपरलेसे नयाँ नेपाल बनी ? यी टमान प्रश्न बौछारके रुपमे आइल बा । नेतालोग होशसे काम करो । दूर दराजमे बैठेवाला निमुखा किसानके पाइल सेवा सुबिधा कटौती करबो टे तोहरन जरुर ओन्हरनके श्राप लगबे करी ।

किसानलोग अपने गाँवके नजदीके रहल गाबिससे सेवा सुबिधा पाइत रहन । अब १०/१५ किलोमिटर दूर जाएक अवस्था आइल बा । गाबिसमे टिरेवाला कर ठोरे हरे । बकिन अब नगरपालिका घोषित होइले पर सर्बसाधारण जनतनके साँसट बह्रगैल बा । एक दुई घण्टामे होएवाला कामके लिए सारा दिन बिताएक परट बा । सय/पचास रुपियामे होएवाला काम हजार/पानसय तिरेक परट बा । का यिहे हो नयाँ नेपालके बिकास ?

भौतिक पूर्वाधारके बिकास कइले बिना धमाधम नगरपालिका घोषित कइले बा । एकर मार प्रत्यक्ष रुपसे कपिलबस्तु जिल्लाके नवघोषित बुद्ध बाटिकामे समाहित होइल दुबिया ओ महेन्द्रकोट गाबिस मारमे परल बा । यी डुनु गाविस चुरे पहाड ओ अर्घाखाँची जिल्लासे जोरल गाबिस हो । जबकि नवघोषित बुद्ध बाटिका नगरपालिकाके नगर कार्यालय जयनगर गाबिसके भवनमे रखगइल बा । जहाँ पुगेक लिए दुबिया गाबिसके जनतनके लिए पहाड होगइल बा । यातायातके नियमित साधन नइ बा । का दिनमे एकठु बस ओ जीप चल्लेसे उ कोनवक जनता सहज रुपसे नगरपालिकासे सेवा सुबिधा लइ पइहिं ? सोचेवाला बात बा ।

मोरिक मनमे जिज्ञासा उठल करे कि लावा बुद्ध बाटिका नगरपालिका टे बरि तामझामके साथ कार्यालय उद्घाटन कइके नगरबासी लोगन सेवा सुबिधा उपलब्ध डेहत्होई । बकिन जब मइ नगरपालिकाके कार्यालय पुग्लु टे नगरपालिकामे दुबिया, महेन्द्रकोट ओ जयनगर गाबिसके प्राबिधिक सहायक ओ कार्यालय सहयोगी दुइठु टेबुल अगोटले बैठल रहन । चार/पाँच जने कार्यालयक भित्तर बाहर करट रहन । एकजने सेवाग्राही मोरिक्के गाँवक रहन । कउन कामसे आइल रहो पुच्छलु टे कहलन लइकक जन्म दर्ता बनवाए आइल रही ।

काम होइल पुच्छलु टे उ मुह लटकाके कहलन– आज दुई दिन हो गइल, एक्ठु जन्म दर्ता नइ बनल । बर्का हकिमवे नइ बा, तौलिहवा गइल बा । पहिले गाबिसमे १/२ घण्टामे काम होजाइट रहे । नगरपालिका होके बरी बेकार होगइल ।

वास्तवमे चाहे जौन काम बिना योजना करबो टे ओहमे सफलता नइ मिली । जैसे कौनो दम्पत्ति लैका जन्माए से पहिले लैकक् पालन पोषण, शिक्षा दीक्षाके सोच बनाके लैका जनमाइठन टे ओकर पालन पोषण बह्रियासे होइठ । नइ टे लैका कुपोषित होजइठन । ओइसहि होइल बा यी बुद्ध बाटिका नगरपालिकाके अवस्था । जैसे पहिले बिकेन्द्रिकृतके नीति लानके सरकार गाँव गाँवमे सेवा सुबिधा उपलब्ध कइले रहे । बकिन सरकार नगरपालिका घोषित कइके उल्टे जनतन के पाइले पाइल सेवा सुबिधा छिनके केन्द्रिकृतके अवधारणा लियानेक खोजले बा । यी बह्रिया काम नइ हो जइसे लागठ । एहमे सरकार ओ स्थानीय नेता लोगके ध्यान जाए ।

दुबिया, कपिलबस्तु

साभारः चली गोचाली मासिक (माघ)

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